
हिमाचल प्रदेश में उद्यानों के विकास के लिए भविष्य की रणनीति इस प्रकार से हैं: -
- पौधों की उत्पादकता में सुधार.
- फल उत्पादन गुणवत्ता में सुधार.
- बागवानी उद्योग में विविधीकरण.
- वायरस मुक्त पौधोंरोपण सामग्री हेतु नर्सरी उत्पादन का आधुनिकी कार्यक्रम .
- विकसित देशो में विभिन्न फ़लों की सुधरी किस्मों तथा मूल वृतों का आयात कर प्रदेश स्तर पर प्रचुर मात्रा में उत्पादन कर बागवानो को वितरित करना.
- फल उत्पादकता को बढाने हेतु सघन फल पौध रोपण को बढावा देना.
- कीटनाशक दवाइयों का कम प्रयोग करने हेतु बागवानो को जैविक विधि द्वारा कीटों व् फलों की बिमारियों को नियंत्रण में लेन हेतु प्रोत्साहित करना .
- बागवानों को तकनीकी ज्ञान व् फलों के विपणन सम्बन्धी सुचना देने हेतु आधुनिक सुचना तकनीक का प्रयोग करना .
- वैज्ञानिक विधि द्वारा पानी का दोहन संग्रहण, जल प्रबंधन में सुधार लाना .
- फल उत्पादकता बढाने हेतु उच्च उद्यान तकनीकों जैसे कि : संरक्षित खेती, जैव प्रौद्योगिकी तथा , सूक्ष्म सिंचाई और प्लास्टिक इत्यादि को बढ़ावा देना.
- फल फसलोत्तर प्रबंधन हेतु वैज्ञानिक आधारभूत संरचना का निर्माण .
- फल उत्पादन की गुणवता को बढ़ाना .
- ब्रांड, विज्ञापन और निर्यात द्वारा फलों के बाज़ार को बढ़ावा देना .
उद्यान विकास को एक उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए निम्न तीन उद्देश्य है :
- आर्थिक विकास
- पोषाहार सुरक्षा
- पर्यावरण संरक्षण





