प्रकृति ने हिमाचल प्रदेश को ऐसी जलवायु से परिपूर्ण किया है जिसमें विभिन्न प्रकार के फलों (समशीतोष्ण से उपोषणदेशीय), फूल, सब्जियां, मशरूम, हॉप्स, चाय, विभिन्न प्रकार की जड़ी बूटियां तथा सुगंधित पौधों को सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है | देश में उगाये जाने वाले सभी प्रकार के फलों, समुद्र तटीय क्षेत्रों में उगाये जाने वाले फलों को छोड़ कर हिमाचल प्रदेश को निम्न चार कृषि जलवायुक क्षेत्रों में बांटा गया है:
हिमाचल प्रदेश में बागवानी क्षेत्र
| क्र. स. | क्षेत्र विवरण | ऊंचाई की सीमा (मीटर एएम्एसल) | वर्षा (सेमी) | उपयुक्त फलों की फसल |
|---|---|---|---|---|
| 1. | मैदानी इलाको के निकटतम पहाड़ी व् घाटी क्षेत्र | 365-914 | 60 - 100 | आम, लीची, अमरूद, लोकाट, खट्टे अंजीर, बेर, पपीता, अंगूर की आगामी किस्मे, जैक फल, केला, आडू की किस्में , प्लम , नाशपाती और स्ट्रॉबेरी इत्यादि . |
| 2. | मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्र (उप शीतोष्ण) | 915-1523 | 90 - 100 | गुठली वाले फल (आड़ू, बेर, खुरबानी, बादाम), ख़ुरमा, नाशपाती, अनार, पेकन नट, अखरोट, कीवी फल, स्ट्रॉबेरी. |
| 3. | उंची पहाड़ीयां और दूर दराज की घाटियां(शीतोष्ण) | 1524-2742 | 90 - 100 | सेब, नाशपाती, चेरी, बादाम, अखरोट, चेस्टनट, हेजलनट, स्ट्राबेरी |
| 4. | शीत एवं शुष्क क्षेत्र (शुष्क समशीतोष्ण) | 1524-3656 | 24 - 40 | सेब, आलुबुखारा, खुबानी की शुष्क किस्म, बादाम, चिलगोजा, पिस्ता नट , चेस्टनट, हेजलनट, अखरोट, , अंगूर और हॉप्स |
मंदी के समय फलों के अलावा मैदानी इलाको की आपूर्ति के लिए सब्जी और फूलों की खेती की जाती है, जब की मशरूम की खेती भूमिहीन किसानो की आय को बढ़ाने के लिए की जा रही है. मधुमक्खी पालन उद्यान उद्योग के लिए सहायक के रूप में एक अनिवार्य गतिविधि है, जोकि शहद और वैक्स के उत्पादन के साथ -साथ फलों को सेट करने और फलों की उत्पादकता को बढाने के लिए परागण एजेंटो को प्रदान करता है :
- ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आय के स्त्रोत को बढ़ाना |
- उद्यान विभाग में रोजगार के साधन उपलब्ध करवाना |
- फल, सब्जियां, शुष्क फलों , मशरूम, शहद, इत्यादि द्वारा पोषक खाद्य पदार्थों को उपलब्ध करवाना |
- लोगों की भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति|
- निरंतर कृषि प्रणाली का विकास|





