छिडकाव सारिणी

छिडकाव सारिणी 2018

सेब के रोगों की रोकथाम हेतु छिडकाव सारिणी – वर्ष 2018

क्रम सं. पौधे की अवस्था दवाई का नाम दवाई प्रति 200 ली. पानीमें रोकथाम टिप्पणी
1 हरी कली कैपटान
या
डोडीन
या
जीरम
600 ग्राम

200 ग्राम

600 मि.ली.
स्कैब  
2 गुलाबी कली मैनकोजैब
या
प्रोपिनेब
या
डिफनोकोनाजोल
600 ग्राम

600 ग्राम

30 मि.ली.
स्कैब  
3 पँखुड़ीपात / फल अवस्था
(मटर के दाने के बराबर)
कारबैन्डाजिम
या
थायोफिनेट मिथाईल
या
हैक्साकोनाजोल टेबुकोनाज़ोज
50 प्रतिशत+ट्राईफ्लोकिसस्ट्रोबीन 25प्रतिशत
 
100 ग्राम


100 ग्राम

100 मि.ली.
सफ़ेदचूर्ण रोग
80 ग्राम
 
स्कैब






 
 
4. फल विकास
(अखरोट के आकार का)
माइक्लोबूटानिल
या
मैनकोजैब
या
प्रोपिनेब
या
डोडीन
या
मैटीराम 55 प्रतिशत +पायराक्लोस्ट्रोबिंन
5 प्रतिशत डब्ल्यूजी
80 ग्राम

600 ग्राम

600 ग्राम

150 ग्राम


300 ग्राम
स्कैब







अल्टनेरिया लीफ
स्पॉट/ब्लाईट/
असामयिक पतझड़
यदि तापमान 30०cसे अधिक हो या अपेक्षित आद्रता अधिक हो तो डोडीन का छिडकाव न करें |
5 फल विकास (क्रमांक 4 से 20 दिन बाद ) टेबुकोनाजोज 50 प्रतिशत+ट्राईफलोकिसस्ट्रोबीन 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी

प्रोपिनेब
या
जीनेब
80 ग्राम


600 ग्राम

600 ग्राम



असामयिक



स्कैब स्कैब,ब्लैक रॉट

 
 
6 फल तोड़ने से पूर्व (फल तोड़ने से 20 से 25 दिन पूर्व) कैपटान
या
जीरम
मैटीराम 55 प्रतिशत+ पायराक्लोस्ट्रोबीन
5 प्रतिशत डब्ल्यूजी
600 ग्राम

600 मि.ली.

300 ग्राम
 
स्कैब,फ्लाई स्पैक/बिटर
रॉट
स्कैब


अल्टनेरिया लीफ
स्पॉट/ब्लाईट
 
7 फल तोडने के बाद कॉपर आक्सीक्लोराईड 600 ग्राम कैकर
 
 

टिप्पणी :- 

  1. यह छिडकाव सारणी सामान्य मौसम के लिए है|


2 यदि छिडकाव के 12 घंटे के भीतर भारी बारिश होती हैं तो सात दिन के भीतर पुनः छिडकाव करें|


3 एक ही कीटनाशक/फफूंदनाशक का प्रयोग बार-बार न करें|


4 कीटनाशक/फफूंदनाशक का प्रयोग बीमारी की सम्भावना पर ही करें|


5 डोडीन के साथ अन्य कोई भी फफूंदनाशक/रसायन न मिलाए|

6 उपरोक्त रसायनों के अतिरिक्त छिडकाव में किसी भी प्रकार का रसायन/कीटनाशी /माईक्रोन्यूट्रीयन्ट/पौधवर्धक हारमोन को न मिलायें ताकि पौधों पर खुरदरापन या अन्य प्रकार के विकार न आने पाये| यदि आवश्यकता हो तो अलग से छिडकाव करें|

7 सेब की गिरी हुई पत्तियों को एकत्रित करके या तो कम्पोस्ट के रूप में गड्ढें में डाल कर सड़ा दें या जला कर नष्ट कर दें तथा बागीचे में गिरे हुए सेब के गिरे हुए पत्ते के ऊपर 5 प्रतिशत यूरिया का स्प्रे करे जिससे पत्तों के सड़ने की प्रक्रिया तेज हो सके या गिरी हुए पत्तियों को इकट्ठा करके जला दे|

8 कॉपर आक्सीक्लोराईड जोकि डॉ. वाई. एस.परमार औधानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी द्वारा जांचा -परखा गया है और पेड के ऊपर दर्शाई गई अवस्था पर छिडकाव हेतु अति आवश्यक है परन्तु यह उत्पाद केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड व पंजीकरण समिति द्वारा अभी तक पंजीकृत नहीं है |
9 सफेद जड़ सड़न रोग की रोकथाम के लिए वर्षा ऋतु के शरुआत में तीन से चार बार कारबेन्डाजिम (0.1%) या ओरियोफजीन (0.02%) +कॉपर सल्फेट (0.02%) का घोल बनाकर पौधों के तौलिए के इर्द- गिर्द 15-20 सै. मी. गहरे सुराक/ छेद बनाकर तर / ड्रेंच करें|सर्दियों के मौसम में ग्रसित पौधों की जड़ो को खोलकर,सक्रमित जड़ो को काट कर बोर्डों पेन्ट का लेप लगाए |
10.तना सड़न रोग की रोकथाम के लिए सर्द ऋतु में तने के पास बने हुए घाव को खुरचने के बाद बोर्डों पेन्ट या अन्य किसी कॉपर आधारित फफूदीनाशक पैन्ट को लगाए |बरसात के दिनों में पौधों के तौलियों को पौधों से 30 सै. मी. की दुरी तक मैनकोजैब (0.3%) के घोल सेतर/ड्रेंच करें |
 


ओलावृष्टि के बाद अन्य सिफारिशें :- 
 

  1. ओलावृष्टि के तुरन्त बाद कारबैन्डाजिम 100 ग्राम या मैनकोजैब 600 ग्राम का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करें |
  2. ओलावृष्टि के 3-4 दिनों के अन्दर 200 ग्राम बोरिक एसिड + 500 ग्राम जिंक सल्फेट +250 ग्राम अनबुझा चूना का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें 
  3. 10-12 दिनों के बाद सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे कि एग्रोमिन,मल्टीप्लेक्स या माइक्रोविट का प्रति 400-600 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करेंतथा ओलावृष्टि से प्रभावित बागीचों में यूरिया (1 कि.ग्रा.प्रति 200 ली.पानी) का छिडकाव करें|