(iv)प्रसार और सलाहकार सेवा:-
क.शिमला, कुल्लू और धर्मशाला में तीन प्लांट टिशू विश्लेषण प्रयोशालाओं की स्थापना फल पौध पोषण सलाहकार सेवाओं के रूप में की गई है, जोकि प्रतिवर्ष लगभग 10000 से 13000 एकत्रित उतक नमूनों के विश्लेषण के साथ-साथ पोषण संबंधी विकारों का समाधान करते है,तथा बागवानों को पोषण हेतु खाद को अपनाने की सलाह देतें है| इससे बागवानो को रासायनिक उर्वरकों का उचित उपयोग करने में मदद मिलेगी|
ख. इस समय उद्यान विभाग के द्वारा फल उत्पादक क्षेत्रों में 337 बिक्री केन्द्र स्थापित है, इनके माध्यम से बिभाग द्वारा कीटनाशकों की पूर्ति की जाती है| पौध संरक्षण गतिविधियों के तहत प्रतिवर्ष लगभग 2.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र लाया गया है, जहाँ हर वर्ष किसानो को कीटनाशक (तकनीकी ग्रेड सामग्री) बाटे जातें हैं| शिमला जिले में रासायनिक दवाईयों के उपयोग को नियन्त्रण करने हेतु एक जैव नियंत्रण प्रयोगशाला स्थापित की गई है|
ग. उद्यान कृषि विस्तार सेवाएं निचले स्तर को मजबूत बनाये हुऐ हैं| इसके अतिरिक्त बागवान किसानों को प्रशिक्षण से संबंधित कार्यक्रम जैसे प्रदर्शन, फ्रूट शो, प्रदर्शनियों, सेमिनारों और किसानों को तकनीकी ज्ञान हेतु कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है|
(v)उद्यान सहायक गतिविधियां :-
क.मौन पालन-मौन पालन विकास के लिए पूरे राज्य में 32 मौन पालन विकास केन्द्रों की स्थापना की गई है जहां पर किसानो को व्यावसायिक मौन पालन करने की तकनीकी जानकारी दी जाती है| किसानों की पूर्ति के लिए लगभग 1256 मधुमक्खी छत्तों को इन केन्द्रों में पैदावार के लिए रखा जाता है. निजी क्षेत्र में मौन पालन को बढावा देने के लिए दो मौन प्रजनन विकास केन्द्र कार्यरत है| शहद के लिए एग-मार्किंग प्रयोगशालायें, एक हाटकोटी (जिला शिमला) और दूसरी चैतरू(जिला काँगड़ा) में स्थापित की गई है|
ख. पुष्पोत्पादन- राज्य के विभिन्न स्थानों में पुष्पोत्पादन को बढ़ावा देने के साथ- साथ पुष्प कृषि की रोपण सामग्री की पूर्ति तथा पैदावार के लिए सात पुष्पोत्पादन नर्सरियों की स्थापना की गई है| फूलों की व्यवसायिक कृषि हेतु एक प्रशिक्षण केंद्र मॉडल पुष्पोत्पादन केंद्र महोग बाग़ चायल (सोलन) में स्थापित किया गया है|
ग .खुम्ब की खेती- उद्यान विभाग द्वारा खुम्ब विकास के लिए चार खुम्ब खाद निर्माण इकाइयां चम्बाघाट (सोलन), पालमपुर, बैजनाथ (कांगड़ा) और बाजुरा (कुल्लू) जिलों में स्थापित की गई है| इसके अतिरिक्त तीस के आसपास खुम्ब खाद निर्माण इकाइयां निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं|
(vi) नई तकनीक का परिचय:
हिमाचल प्रदेश में बागवानी विभाग नई तकनीकों की शुरुआत के लिए आवश्यक कदम उठा रही है जैसे की सूक्ष्म सिंचाई, सरंक्षित खेती, बागवानी में जैव उर्वरकों का प्रयोग, बागवानी उपकरणों का सुधार, उपकरण एवं मशीनरी, रोग एवं पोषण संबंधी विकारों के निदान के लिए क्षेत्र नैदानिक सुविधाएं देना|
(vii) सेब और आम के लिए डब्ल्यू.बी.सी.एस.:
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से सेवा में |
डब्ल्यू.बी.सी.एस. रबी, 2009-10 |
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20-17/2009-उद्यान-IV उद्यान निदेशालय, हिमाचल प्रदेश, शिमला-2 हिमाचल प्रदेश, शिमला-171002. 1. रजिस्ट्रार सहकारी समितियां, हिमाचल प्रदेश, शिमला 171009. 2. प्रबंध निदेशक हि०प्र० राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड, मॉल, शिमला-171001. 3. महाप्रबंधक संयोजक, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, हिमाचल प्रदेश, यूको बैंक, महाप्रबंधक कार्यालय, हिमलैंड होटल एनेक्सी, सर्कुलर रोड, शिमला 171001. 4. महाप्रबंधक, कृषि व् ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), ब्लॉक नं०.31, एसडीए कांप्लेक्स, शिमला 171009. 5. क्षेत्रीय प्रबंधक, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी इंडिया लिमिटेड क्षेत्रीय कार्यालय,एस सी ओ नं०.64-65, ग्राउंड फ्लोर, सेक्टर 8 सी, मध्य मार्ग, चंडीगढ़ 160009. दिनांक शिमला |
विषय: - सेब एवं आम की फसलों के लिए शुरुआती मौसम के आधार पर फसल बीमा योजना (डब्ल्यू.बी.सी.एस.), 2009-2010 में रबी के मौसम वाले फसल ईकाई क्षेत्रों की .अधिसूचना.
श्री मान,
भारत सरकार के द्वारा कृषि मंत्रालय, कृषि सहयोग विभाग, कृषि भवन , नई दिल्ली को सूचित किया जाता है कि उनके पत्र सं.13011 / 01/2008 - क्रेडिट-II को दिनाक 11 सितंबर, 2009 को स्वीकृति दे दी गई है और साथ ही योजना में समाहित कार्यकाल नियमो के अनुसार 2009-10 में रबी सीजन के दौरान विद्यमान मौसम मार्गदर्शन पद्धति पर आधारित फसल बीमा योजना (डब्ल्यू.बी.सी.एस.) के कार्यान्वयन के लिए अपनी प्रशासनिक स्वीकृति एवं निर्देश जारी कर दिये गए है. भारत सरकार के निर्णय के अनुसार एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी इंडिया लिमिटेड (एआईसी) के रूप में मौसम आधारित फसल बीमा योजना (डब्ल्यू.बी.सी.एस.) का कार्यान्वयन ए.आई.सी.एजेंसी द्वारा किया जाएगा.
राज्य के मुख्य मंत्री व् बागवानी एवं कृषि विभाग के सचिव की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक द्वारा 10/08/2009 को 4:00 बजे पर फसल बीमा का निर्णय लिया गया था, 2009-2010 की विद्यमान परिस्थितियों के आधार पर मार्गदर्शक फसल बीमा योजना (डब्ल्यू.बी.सी.एस.) सेब के लिए ठियोग, जुब्बल, नारकंडा, चिडगांव ब्लाक शिमला जिले में, आनी ब्लॉक कुल्लू जिले में और आम की फसल के लिए कांगड़ा जिले में फतेहपुर, नूरपुर, इंदौरा, नगरोटा, सुरियां ब्लॉकों में लागू की जायेगी.:-





