(5)कृषको के लिए उपयुक्त क्षेत्र:
सेब और आम की फसल उगाने वाले सभी बागवान किसान (हिस्सेदार एवं पट्टेदार) किसी भी संदर्भ इकाई क्षेत्र में मान्य होंगे| अनिवार्य योजना : सभी ऋणी आवेदक बागवानो के लिए अर्थात् अधिसूचित सन्दर्भ इकाई क्षेत्रों में बागवान किसानों को आम एवं सेब की फसल हेतु एक वितीय संस्था से ऋण सीमा की स्वीकृती 5 दिसम्बर 2009 को दी गई है |
स्वयंसेवी(वालंटरी):गैर ऋणी किसानों के लिए अर्थात वो बागवान जिनको किसी भी अन्य वित्तीय संस्था से ऋण की स्वीकृती नहीं दी गई है|
योजना के उद्देश्य हेतु सभी जिलों में वितीय संस्थान, केन्द्रीय सहकारी बैंक और उनसे सम्बंधित पीएसी भी शामिल करना, राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के अंतर्गत सभी वाणिज्यक बैंक एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक निर्धारित किये गए है |(6)दुर्गम क्षेत्र:खराब मौसम होने के पर "प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं" का अनुमान लगाना तथा इस योजना के अंतर्गत होने वाली शुरुआती फल फसलों की हानि को भी शामिल किया जाएगा |सेब और पाले के लिए द्रुतशीतन(chilling) की आवश्यकता, तापमान में उतार चढ़ाव और वर्षा (कम या अधिक), तापमान में उतार चढ़ाव, वर्षा, आम की फसल के लिए हवा की गति |विशेष "प्रतिकूल मौसमीय घटनाएं" जो अपनी समय अवधि के साथ अनुकूल (अनुबंध I से VI) शब्द पत्र के अनुसार दी गई है |(7)जोखिम अवधि(जैसे बीमाकृत अवधि):फल फसलों के अनुसार जोखिम अवधि(टाइम)का उल्लेख शब्द पत्र में किया गया है|(8)मौसमी सुधार:गैर ऋणी बागवानों से बीमें के आवेदनों को पी ए सी एंव बैंक शाखाओं के माध्यम से लेना तथा एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया द्वारा जारी की गई घोषणाओं को नीचे दी गई तालिका के अनुसार स्वीकृति हेतु बैंकों में प्रस्तुत करना होगा |
| फसल |
बागवान |
अंतिम तिथि | बैंको व् एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया के एजंटों द्वारा विज्ञप्ति जमा करने की अंतिम तिथि |
| सेब
आम |
ऋणी | 5 दिसम्बर 2009 तक
ऋण सीमा की स्वीकृती |
05.01.2010 |
| गैर ऋणी | 1.प्रस्ताव | 1.15-12-2009 | |
| बैंकों द्वारा गैर ऋणी किसानों से आवेदन 30-11-2009 तक के लिए स्वीकार किए जाएँगे | एजेंटों के द्वारा आवेदन जमा करने की अंतिम तारीक 30-11-2009 तक है| | 2. 03-12-2009 |
एक बार तिथि समाप्त होने पर बीमे के कवरेज की अनुमति नहीं दी जाएगी|
(9)बीमाकृत राशि की कार्यप्रणाली:
(क) वितीय संस्थाओं द्वारा विद्यमान क्षेत्र में ऋणी आवेदक बागवानो का बीमा कवरेज बुनियादी स्तर पर करना तथा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का एक केन्द्रीय बैंक प्रणाली के रूप में प्रयोग किया जा सकता है |
(ख) एआईसी (AIC)अधिकृत प्रतिनिधि एवं बीमा एजेटों,वितीय संस्थाओं के द्वारा गैर-ऋणी आवेदक बागवान किसानों का बीमा कवरेज बुनियादी स्तर पर किया जाता है |
(ग) एग्रीकल्चर इंश्योरंस कम्पनी ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा केन्द्रीय बैंक शाखाओं के आवेदनॉ का भुगतान करना एवं उनके द्वारा जमा की जाने वाली प्रीमियम राशि (सर्विस टैक्स) को छोड़कर 5 प्रतिशत सेवा शुल्क की छुट दी जाती है |उनके द्वारा योजना की सेवाओं पर किये जाने वाले आकस्मिक प्रबंधन व्यय को बांटने की विधि से किया जा रहा है |
(10)बीमाकृत राशि :
बीमाकृत राशि (खेती की कुल लागत) के बराबर होती है तथा इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के उप विभाजित कार्यालय शीट (टर्म शीट) में दिए गए है |
प्रत्येक बागवान के लिए बीमाकृत राशि बागवानी उत्पादों के अनुसार होगी तथा टमाटर, आलू, सेब और आम की फल फसलों हेतु बीमित राशि के लिए कार्यालय (टर्म)शीट में प्रति हेक्टेयर/प्रति पेड़ तथा पेड़ों की संख्या दर्शानी होगी |
"सन्दर्भ इकाई क्षेत्रों " में अधिसूचित फल फसलों की कृषि हेतु प्रति बागवान इकाई क्षेत्र एग्रीकल्चर इंश्योरंस कम्पनी ऑफ इंडिया लिमिटेड,केन्द्रीय बैंकों द्वारा निर्धारित की जायेगी :
ऋणी आवेदक किसान:ऋण वितीय संस्थाओं के द्वारा अधिसूचित फल फसलों की कृषि हेतु और अधिकतम क्रेडिट सीमा (MCL) के उद्देश्य को निश्चित करने से पहले ऋण आवेदन पत्र निर्धारित किये जाते है |
सेब एवं आम की फल फसलों के लिए अधिकतम क्रेडिट सीमा के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों को मंजूरी दी गई है, जिसके अनुसार बागवान को स्वयं ही पेड़ों की आयु, वर्ग, तथा संख्या का संकेत घोषणा पत्र बैंक को देना होगा |
गैर ऋणी बागवान. बीमित प्रस्ताव पपत्र में बागवानी कृषि के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में अधिसूचित फल फसलों को निर्धारित करना |
11.प्रीमियम दरें:
एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया द्वारा प्रीमियम मूल्यांकन पद्वति के आधार पर 11.50 प्रतिशत से अधिक सेब और आम की फल फसलों के लिए सेवा शुल्क 10.30 प्रतिशत तथा बिमाकिंत प्रीमियम दरों की गणना करना |
12.प्रीमियम शेयरिंग एवं उपदान:
बीमित बागवानों को कुल बीमाकृत राशि का 50 प्रतिशत तथा केन्द्र और राज्य सरकार के द्वारा 50:50 के अनुपात के आधार पर दिया जाता है |(13)प्रीमियम प्रेषण:
ऋणी और गैर ऋणी किसानो को एग्रीकल्चर इन्शोरेन्स कम्पनी ऑफ इंडिया लिमिटेड में भुगतान हेतु एक्सिस बैंक चंडीगढ़ खाता संख्या 041010200007856 में डिमांड ड्राफ्ट तैयार करने चाहिए, और उसे एग्रीकल्चर कम्पनी ऑफ इंडिया लिमिटेड चंडीगढ़ एससीओ 64-65 सेक्टर 8सी के पते पर भेज दिया जाना चाहिए |
(14)मुआवजा का भुगतान:
(I)एग्रीकल्चर इन्शोरेन्स कम्पनी ऑफ इंडिया लिमिटेड प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं के कारण होने वाले सभी भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा और इस योजना के अंतर्गत नियम व शर्तों को प्रीमियम भुगतान तालिका के साथ पढ़ें |
(II)केवल विपरीत मौसमीय घटनाओं के मामलो पर ही भुगतान किया जायेगा | चल रहे मौसम एवं सामान्य मौसम के बीच में होने वाले विपरीत मौसमीय बदलावों को एक निर्दिष्ट समयावधि के दौरान सन्दर्भ मौसम केन्द्र में रिकॉर्ड किये जाते है | विपरीत मौसमीय बदलावों की दशाओं में अधिसूचित सन्दर्भ इकाई क्षेत्रों में अधिसूचित फल फसलों हेतु चल रहे मौसम का पूर्व निर्धारित मौसमीय पैरामीटर उपयुक्त है|सभी बीमाकृत बागवानों द्वारा सन्दर्भ इकाई क्षेत्रों में अधिसूचित फल फसलों की पैदावार बढ़ रही है | जिससे ज्ञात होता है कि विपरीत मौसमीय बदलाव के कारण सभी को सामान रूप से फल फसलों की हानि का सामना कारण पड़ता है तथा साथ ही वे सभी सामान दर पर एजेंसियों से भुगतान प्राप्त कर सकते है |
(III) भुगतान वितरण
(क)एग्रीकल्चर इन्शोरेन्स कम्पनी ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा आमतौर पर 45 दिनों की बीमा अवधि समाप्ति के पश्चात मुख्य मौसमी सूचना(डाटा) की प्राप्ति के उपरांत क्षेत्रीय बैंको को भुगतान किया जाता है |
(ख)अभी तक बीमें का सम्बन्ध स्वयं भुगतान प्रक्रिया से सम्बंधित है ,यानि एग्रीकल्चर इन्शोरेन्स कम्पनी ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा प्राप्त वास्तविक मौसमीय सूचना (डाटा)की जाँच के आधार पर सम्बंधित केन्द्रीय बैंकों एवं वितीय संस्थानों के माध्यम से बीमित राशि को बीमाधारकों के खातों में जमा कर दी जायेगी |
(17)विभिन्न एजेंसियों की भूमिका:
i) हिमाचल प्रदेश में उपरोक्त वर्णित योजना के कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी), प्रमुख बैंक प्रबंधक,सहकारी बैंक तथा एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी इंडिया लिमिटेड (कार्यान्वयन एजेंसी) तत्काल आवश्यक कार्यवाही करेंगी|
ii) हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा जारी की जाने वाली शेयर व मुकदमो की विज्ञप्ती से पहले क्रियान्वयन एजेंसियों जैसेकि एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया बीमा धारको के दावों का भुगतान जल्द से जल्द करेगा | यदि किन्ही कारणों से दावों के भुगतान में देरी हो तो क्रियान्वयन एजेंसियों की एकमात्र जिम्मेदारी होगी |
iii) बैंको को क्रियान्वयन एजेंसियों से दावों की राशि प्राप्त करने की तारीक मिलने के उपरांत बैक द्वारा यह तय किया जाता है कि सभी लाभार्थियों को समान रूप से दावों की बीमित राशि आवंटित की गई है |
iv) इस योजना के व्यापक प्रचार हेतु क्रियान्वयन एजेंसियां प्रमुख व्यवस्थाओं का प्रबंधन करेगी|
v) सयोंजक व जिला स्तरीय बैंकर्स सीमितियों की समय समय पर बैठकों में योंजना की प्रगति की जाँच होती है |
पाइलट (प्रायोगिक) मौसम आधारित बीमा योजना पृथक दिशा निर्देश उपलब्ध करवाए गए है बैंकों वितीय संस्थाओं एवं एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया लिमिटेड से अनुरोध है कि वे इन उपर्युक्त दिशा निर्देस्हीं का सख्ती से पालन करें |
संलग्न करें: - जैसे की ऊपर.
भवदीय,
उद्यान निदेशक, हिमाचल प्रदेश, शिमला- 2
पृष्ठांकन.सं. 20-17/2009-उद्यान-IV शिमला-2 दिनांक 2009
सूचना की एक प्रति(कॉपी) उपरलिखित को सूचना एवं आवश्यक कार्यवाई हेतु प्रेषित की गई है:-





