
पत्ती विश्लेषण प्रयोगशालाओं में पौधों की पतियों के रासायनिक विश्लेषण के आधार पर फल उगाने वाले क्षेत्रों में बगीचों की पोषक तत्वों की स्थिति का आंकलन करना है ताकि बाद में उन क्षेत्रों का पोषक मानचित्र तैयार किया जा सके
ऐसी तीन प्रयोगशालायें फल फसलों के उत्पादन क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं. .
| स्थान | स्थापना का वर्ष | विश्लेषण क्षमता (नमूनों की संख्या) | जिलों के नाम | विश्लेषण के लिए उपलब्ध की गई सुविधा |
|---|---|---|---|---|
| नवबहार , शिमला | 1975 | 10000 | शिमला, किन्नौर, सोलन, सिरमौर, बिलासपुर | सूक्ष्म और दीर्घ पोषक तत्व |
| बजौरा (कुल्लू) | 1987 | 5000 | कुल्लू, मंडी, लाहौल एवं स्पीति | सूक्ष्म और दीर्घ पोषक तत्व |
| धर्मशाला (कांगड़ा) | 1983 | 5000 | काँगड़ा, ऊना, हमीरपुर, चंबा | सूक्ष्म और दीर्घ पोषक तत्व |
ग्रैन्डिंग इकाई के नमूने:
जिला किन्नौर के रिकांगपियो तथा जिला चंबा के पांगी में दो पत्ती ग्रैन्डिंग इकाइयों की स्थापना की गई है| जहाँ पत्तियों का प्रारंभिक दोहन कर मुख्य विश्लेषण किया जाता है





